Showing posts with label '' दिल का गुबार ''. Show all posts
Showing posts with label '' दिल का गुबार ''. Show all posts

Sunday, April 4, 2010

'' दोस्‍तों के पैगाम दोस्‍तों के नाम ''



चाहे दोस्‍ती हो या मुहोब्‍बत सूरत से नहीं दिल से होती है

सूरत उनकी खुद ही अच्‍छी लगने लगती है

जिनकी कद्र दिल से हुआ करती है ।



जुदाई का दुख सह नहीं सकते

भरी महफिल में कुछ कह नहीं सकते

पूछो हमारे बहते आंसूओं से

वो भी कहेंगे हम आपके बिना रह नहीं सकते ।

Tuesday, March 30, 2010

'' दोस्‍तों के पैगाम दोस्‍तों के नाम ''


हर ऐक जज्‍बात को जुबां नहीं मिलती
हर एक आरजू को दुआ नहीं मिलती
मुस्‍कान बनाये रखो तो दुनिया साथ है आपके
ऑसूओं को तो ऑखों में भी पनाह नहीं मिलती ।


सपने थे सपनों के आप साहिल हुए
ना जाने कैसे हम आपके प्‍यार के काबिल हुए
कर्जदार है हम उस हसीन पल के
जब आप हमारी दुनिया में शामिल हुए ।



याद रखेंगें हम हर कहानी आपकी
लहरों के जैसी वो रवानी आपकी
आपने हमको जो दिल में अपने बसा रखा है
ये किस्‍मत थी हमारी या मेहरबानी आपकी ।

Saturday, March 27, 2010

'' दोस्‍तों के पैगाम दोस्‍तों के नाम ''



बिकता है गम हुस्‍न के बाजार में

लाखेां दर्द छिपे होते हैं एक छोटे से इन्‍कार में

जो हो जाओ अगर जमाने से दुखी

तो स्‍वागत है हमारे दोस्‍ती के दरबार में ।


-----------------------------------------------------


चॅाद को अकेले कभी ना पाओगे

आगोश में सितारे मिल ही जायेंगे

कभी अगर तन्‍हा हो तो

आंखें बंद कर लेना

अनजान चेहरों में भी हमें ही पाओगे ।

-------------------------------------------------------------

दुनिया में खु शी उनको नहीं मिलती है

जो अपनी शर्तों पर जिन्‍दगी जीते है

बल्कि उहें खुशी उन्‍हें मिलती है

जो दूसरों के लिये जिन्‍दगी की

शर्तों को बदल देते हैं ।

-----------------------------------------------------

दायरे में रहना ही जिन्‍दगी है

गमों को सहना भी जिन्‍दगी है

यूं तो रहती है होठों पे मुस्‍कराहट

पर शायद चुपके चुपके रोना भी जिन्‍दगी है ।

--------------------------------------------------------


यकीन नहीं तुझे अगर खुद पे

तो जरा अजमा के देख ले

एक बार तूं जरा मुस्‍कराकर देख ले

जो ना सोचा होगा तुने ---- वो मिलेगा

बस इक बार अपना कदम बढ़ा कर देख ले ।

------------------------------------------------------------


अनिल हर्ष


Friday, March 26, 2010

'' दोस्‍तों के पैगाम दोस्‍तों के नाम ''




दिल के पास उनका घर बना लिया

ख्‍वाब में हमने उनको बसा लिया

मत पूछो कितना चाहते हैं हम उनको

बस यूं समझलो ---

उनकी हर खता को अपना मुक्कदर बना लिया ।


........................................................................................................


अपनी दुनिया में यूं खो न जाना

दूर रहके हमको भूल न जाना

खबर हमारी ना ले सको तो कोई गम नहीं

पर अपनी खबर हमें देना भूल न जाना ।


........................................................................................................




ये दिल प्‍यार के काबिल न रहा

कोई भी इजहार के काबिल न रहा

इस दिल में बस गयी तस्‍वीर आपकी

अब तो चांद भी दीदार के काबिल न रहा ।


.............................................................................................................